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Poll Khol: छतरपुर जिला बना अवैध हथियार की मंडी; जिले में 55 माह में आर्म्स एक्ट के 1924 अपराध दर्ज पर सरगना का बाल भी बांका नहीं

आओ … खरीदो …. करो धाँय – धाँय≠≠

छतरपुर जिले में सजी हैं हथियारों की मंडी-

55 माह में आर्म्स एक्ट के 1924 अपराध दर्ज पर सरगना का बाल भी बांका नहीं –

खाकी का न्योछावर उसूल,, यह नहीं पूछेंगे की तमंचा बेचने वाला सरगना कौन

(धीरज चतुर्वेदी)

पहले भी छतरपुर जिला लुटता था और आज भी लूटा जा रहा हैं। एक आतंक से जनता गुजर रही हैं। जहाँ चौतरफ़ा माफियाओ का राज समझ आता हैं। चौकाने वाले आंकड़े कि बीते 55 माह में छतरपुर जिले में 1924 आर्म्स एक्ट के अपराध दर्ज होते हैं पर असलाहो के मुख्य सरगना को तलाशने की मप्र की शिव सरकार का तंत्र कोशिश ही नहीं करता। आरोप लगते हैं कि जिले भी ठेके पर हैं जहाँ की बोली लगती हैं? अब इन आरोपों में कितना सच हैं यह तो जाँच का विषय हैं पर जनता तो भुगत रही हैं।उत्तरप्रदेश सीमा से सटा छतरपुर जिला की पहचान राजा छत्रसाल से होती हैं पर उनकी भूमि पर अब माफियाओ का राज हैं। माफिया और सरकारी तंत्र के कमाऊ पूतो ने इस धरती को नापाक घोषित कर दिया हैं जिसमे भाजपा सरकार का तंत्र भी शामिल हैं। अब तो छतरपुर जिला अवैध हथियारों की घोषित मंडी का स्वरूप ले चुका हैं। देशी तमंचो की अवैध खरीद फरोख्त का मुख्य अड्डा हैं। जिले में बढ़ते अपराध का कारण भी यहीं हैं कि खुली मंडी में अवैध हथियार खरीदना बेहद आसान हैं। यह आरोप नहीं हैं बल्कि जिले के आर्म्स एक्ट में दर्ज अपराध के मामले गवाह बन रहे हैं। छतरपुर जिले के बीते 55 माह में 1924 आर्म्स एक्ट के अपराध दर्ज हुए। जनवरी 2017 से जुलाई 2021 यानि 55 माह में छतरपुर पुलिस ने देशी तमंचे अपना रिकॉर्ड सुधारने के लिये बड़ी तादाद में पकडे लेकिन इन कट्टो को बेचने वाला मुख्य सरगना कौन था इसे तलाशने की कोशिश नहीं की गई। छतरपुर जिले के बीते 55 माह की बात की जाये तो वर्ष 2018 में सबसे अधिक 654 मामले आर्म्स एक्ट में दर्ज हुए। वर्ष 2017 में मात्र 186 अपराध ही इस आर्म्स एक्ट की धारा में पंजीबद्ध हुए। वर्ष 2919 में 385 और 2020 में 445 अपराध दर्ज हुए। बात करें 2021 की तो जनवरी से जुलाई माह तक 445 आर्म्स एक्ट के अपराध दर्ज हुए पर यह हथियार बेचने वाले कौन थे, यह मप्र सरकार की पुलिस नहीं जानती। पुलिस तो अपराध पर गिरफ्तारी कर अपने दायित्व की खानापूर्ति करने तक सीमित हैं । हाल ही में छतरपुर जिले में कई संगीन वारदाते घटित हुई। खुलेआम गोलियों की आवाजों ने सनसनी फैला दी। दुश्मन को मौत के घाट उतारने के देशी तमंचो का उपयोग हुआ। पुलिस ने आरोपियों को हत्या में प्रयोग किये गये अवैध हथियार सहित गिरफ्तार कर फोटो सेशन किये। इन आरोपियों के पास अवैध असलाहा कहाँ से आये थे, इन्हे बेचने वाले कौन हैं, पुलिस ने जड़ तक पहुंचने की कोशिश ही नहीं की। तभी तो छतरपुर जिले में हथियारों की मंडी सजी हुई हैं जहाँ आसानी से देशी तमंचे, पिस्टल, रिवाल्वर आदि उपलब्ध हों जाते हैं। वारदात करने वाले इन्ही अवैध हथियारों की दम पर घटनाओ को अंजाम देते हैं और पुलिस औपचारिक कार्यवाही कर अपनी जवाबदेही से मुक्त हों जाती हैं। आरोप लगते हैं कि अवैध हथियारों कि तह तक नहीं पहुंचने के एवज में पुलिस की जेबे भर दी जाती हैं। यह कहे कि पुलिस की अवैध कमाई का साधन भी अवैध हथियार हैं। इन आरोपों को इसलिए बल मिलता हैं क्यों कि अवैध हथियार की जप्ती पर पुलिस ने चेन तोड़ने की कोशिश ही नहीं की। जिससे छतरपुर जिले में अपराधियों का आतंक दहशत का कारण बन गया हैं। शांति के टापू पर शांति कहीं नज़र नहीं आती। यह तो अशांत क्षेत्र घोषित हों चुका हैं। अपराधियों का तांडव जारी हैं क्यों कि छतरपुर जिला अवैध हथियार की मंडी बना हैं जहाँ असलाहा खरीदो और ट्रेगर दबाकर कर दो धाय – धाय।

अरविन्द जैन

संपादक, बुंदेलखंड समाचार अधिमान्य पत्रकार मध्यप्रदेश शासन

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