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प्रधानमंत्री आदर्श ग्रामो के अनादर्श दर्शन- नहीं बदले हालात, घोषित 100 में एक गांव भी नहीं बना आदर्श

गबन घोटालो का आदर्श स्थापित करती ग्राम पंचायते

(धीरज चतुर्वेदी) कहावत तो यह हैं कि राम नाम की लूट हैं, लूट सके तो लूट। अब मायने बदल चुके हैं। बेईमानी की लूट हैं, बईमानों लूट सको तो लूट। सरकारी योजनाये इस कदर गबन घोटालो में फंसी हैं कि अरबो रूपये के खर्च के बाद भी आमजन बुनियादी सुविधाओं को तरस रहा हैं। मोदी सरकार की आदर्श ग्राम योजना नौकरशाहो की बेईमानी की भेंट चढ़ गई।चयनित ग्राम पंचायते आदर्श तो नहीं बन पाई पर यह जरूर हैं कि घोटालो गबन के लिये आदर्श स्थापित कर गई।

मोदी सरकार के सांसद के गोदनुमा गांव में हर सुविधा उपलब्ध कराने की योजना भले ही विफलता की कहानी कहती हो। दूसरी ओर केन्द्र सरकार के महत्वाकांक्षी मिशन के तहत् बुंदेलखंड के छह जिलो की 850 ग्राम पंचायतो को वर्ष 2017 में चयनित किया गया था।जहां अक्टूबर 2019 तक हर सुख सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था।। सरकार ने इसे गरीबी मुक्त ग्राम पंचायतो का नाम दिया था ।केन्द्र सरकार के मिशन अंतोदय अर्न्तगत मध्यप्रदेश की 4622 ग्राम पंचायतो का चयन किया गया था । जिसमें बुंदेलखंड के छह जिलो छतरपुर, सागर, टीकमगढ, दमोह, पन्ना ,टीकमगढ और दतिया जिले के 40 जनपदो की 850 ग्राम पंचायतो का चयन किया था । जिन्हे 2 अक्टूबर 2019 तक गरीबी मुक्त करने का लक्ष्य निर्धारित था । इसमें सागर जिले की 175, छतरपुर की 100, दमोह 175, पन्ना 175, टीकमगढ 175 और दतिया जिले की 50 ग्राम पंचायते थी । इन ग्राम पंचायतो के सर्वागीण विकास की कार्य योजना बनाकर इनमें रहने वाले व्यक्तियो को आर्थिक , सामाजिक और राजनीतिक रूप से सशक्त बनाना था । इसके लिये सरकार के विभिन्न विभागो को दिशा निर्देश जारी किये थे । पुलिस विभाग प्रयास करेगा कि निर्धारित लक्ष्य तक ये ग्राम पंचायते अपराध और विवाद मुक्त हो। इसी तरह लोकस्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग केा स्वच्छ जल उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी तय की गई थी ।

यह आर्दश ग्राम पंचायते कुपोषण मुक्त होने के साथ यहां रहने वालो को प्राथमिक तौर पर उपचार और दवाईयां उपलब्ध हो, इसकी जवाबदेही स्वास्थ्य विभाग को दी गई थी । स्कूली शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी थी कि ग्राम पंचायत के समस्त बच्चे स्कूल जाये वो भी नियमित रूप से। साथ ही उचित भवन और आवश्यक सामग्री बच्चे को मुहैया होना चाहिये। सबसे बडा कार्य पंचायत एंव ग्रामीण विकास विभाग को पूरा करना था । हर ग्राम पंचायत में खेल मैदान, व्यायम शाला, सीसी रोड, ढकी नालियां, बारहमासी संपर्क पक्की सडक, बीमा-पेंशन योजना का पात्रधारियो को लाभ, राशन कार्ड की उपलब्धता, सहित मनरेगा के तहत् 100 दिवस का रोजगार उपलब्ध कराने का लक्ष्य तय किया गया था । यह गरीबी मुक्त ग्राम पंचायते खुले में शौचमुक्त होकर ओडीएफ घोषित होगी। वहीं धुआं रहित चूल्हा अर्थात हर घर में गैस कनेक्शन दिया जायेगा।

याद करे कि प्रधानमंत्री ने सांसद आर्दश ग्राम पंचायतो में भी कुछ इसी तरह के लक्ष्य और याोजना तय की थी। आवश्यक बजट के अभाव में सांसदो की आर्दश गांव योजना नाकाम साबित हुई थी । फिर गरीबी मुक्त ग्राम पंचाायतो को चयनित किया गया था । जिनमें गांधी जंयती 2019 का लक्ष्य तय किया गया था । इन गांवो को आर्दश बनाने की जिम्मेदारी जनप्रतिनिधियो को ना सौंपकर नौकरशाह को दी गई थी । यह केन्द्र सरकार का महत्वाकांक्षी मिशन था। निर्धारित तय सीमा के दो साल बीत जाने के बाद भी छतरपुर जिले कमोवेश चयनित कोई भी ग्राम पंचायत योजना के उद्देश्य का साकार रूप लेकर आदर्श स्थापित नहीं क़र पाई। ग्राम पंचायतो के निर्माण कार्यों में घोटाले और गबन तो अब आम बेईमानी की सुर्खियों में हैं। योजनाओं को में खुटका करने के पूरा तंत्र काम कर रहा हैं। आरोप लगते हैं कि ग्रामो का स्थानीय तंत्र और जिले के अधिकारियो की मिलीभगत से विकास कार्यों की आढ़ में बेईमानी को रचा जाता हैं। ग्रामो की अंदरूनी सीमा की सड़को, नालियों, मनरेगा के कार्यों और कागजी मज़दूरों की दिहाड़ी हजम जैसे मामले सुर्खिया बटोर रहे हैं। लाखो करोडो की सरकारी धनराशि को दीमक की तरह चट किया जा रहा हैं। इसी मकड़जाल में प्रधानमंत्री की आदर्श ग्राम योजना भी फंस गई हैं। कोई ग्राम ऐसा नहीं हैं जो प्रधानमंत्री में मॉडल पर खरा उतरा हों। यह कहे कि योजनाये बनती हैं कागज रंगने के लिये जिनकी आबंटित राशि एक नये घोटाले को जन्म दें जाती हैं। एक जाँच होती हैं जो ख़ुद जाँच बनकर रह जाती हैं। कारण कि यह तो लूट हैं जिस लूट में कोई पीछे नहीं हैं। आमजन इंतज़ार और उम्मीद में रहता हैं कि उसके भी कभी ना कभी अच्छे दिन आयेंगे।

*छतरपुर जिले के चयनित आदर्श ग्राम*

जनपद बड़ामलहरा – सतपारा, जसगुंवाकला, मेलवार, छाईकुआं, बमनी, कर्री, अंधियारा। जनपद बक्सवाहा – वीरमपुरा, तेइयामार, नैनागिर, केरवारा, देवरी, निवार, देवपुर, खमरिया, मड़ियाघाटी, पाली, महुरा, सुजारा, कुसमाङ, कंजरा, निमानी। जनपद लवकुशनगर – बगमऊ, बछोन, बसंतपुर, लुघगांव, सिमरिया, भेरा, बम्हौरीपुरवा, परसनिया, पुरवा बम्हौरी, भवानीपुर। जनपद गौरिहार – पल्टा, बरहा, सरबई, मझपटिया, नाहरपुर, महुईखुर्द, कितपुरा, हनुखेड़ा, नादोता, दादूताल। जनपद राजनगर – खैरी, अकोना, बसारी, घूरा, नयागांव, कुटिया, पीरा, लखेरी, पहाड़ी हीराजू, धवाड, गंज, बरेठी, धोगुवा, पाटन, भियाताल। जनपद नौगांव – बिलहरी, नयागांव, धरमपुरा, रानीपुरा, गलान, करारागंज, चंदोरा, तिदनी, चोबरा, सहानिया, सरसेड, सिंगरावनखुर्द, लहदरा, भदर्रा, परेधा, जोरन, इमलिया। जनपद बिजावर – डारगुंवा, लखनगुवा, जखरोनकला, पाली, बकसहि, पतरा, शाहगढ, नयाताल, बड़ागांव, धरमपुरा, रजपुरा, देवरा, विजयपुरा, बक्सवाहा, गोपालपुरा। जनपद छतरपुर – टुडर, धोरी, हतना, खडगाय, कूंड, बरकोहा, सींगोंन, बरद्वाहा, काशीपुरा, धामची।

अरविन्द जैन

संपादक, बुंदेलखंड समाचार अधिमान्य पत्रकार मध्यप्रदेश शासन

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