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पुलिस प्रशासन के खिलाफ खड़े हुए जिले के पत्रकार: गलत रिपोर्टिंग को आधार बताकर दो पत्रकारों पर हुआ था मामला दर्ज

छतरपुर। सिटी कोतवाली पुलिस के द्वारा महिला की मौत से जुड़े एक संदेहास्पद मामले में गलत रिपोर्टिंग को आधार बताकर दो वरिष्ठ पत्रकारों धीरज चतुर्वेदी एवं भूपेन्द्र सिंह के विरूद्ध विगत रोज धारा 288क के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। पुलिस की यह कार्यवाही कई मामलों में सवालों से घिर गयी है। महिला से जुड़ी रिपोर्टिंग पर पुलिस के आरोप हैं कि इस रिपोर्टिग से रेप पीडि़ता की पहचान उजागर की गई जबकि पुलिस ने इस मामले में रेप की एफआईआर ही नहीं की है। पत्रकारों पर दर्ज इन मामलों को अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला बताते हुए मंगलवार को जिला मुख्यालय और कस्बायी क्षेत्रों से आए एक सैकड़ा पत्रकारों ने जमकर हल्ला बोला। पत्रकारों के द्वारा पहले शहर के सर्किट हाउस में इस विषय पर एक बैठक का आयोजन किया गया। बैठक के उपरांत सभी पत्रकार पैदल मार्च करते हुए पुलिस अधीक्षक कार्यालय  पहुंचे और यहां पुलिस महानिदेशक व गृह सचिव म.प्र. शासन के नाम एएसपी विक्रम सिंह को ज्ञापन सौंपा गया। इस दौरान जिला पुलिस प्रशासन, पुलिस अधीक्षक के खिलाफ नारेबाजी भी की गई।

ज्ञापन में कहा गया है कि जिस रिपोर्टिंग को आधार मानते हुए दो पत्रकारों पर मुकदमा कायम किया गया है वही रिपोर्टिंग जिले भर के अखबारों और चैनलों के द्वारा की गई फिर भी पुलिस के द्वारा रंजिश के तहत दो लोगों पर गलत एफआईआर की गई है। मामला 26 अक्टूबर का है जब कोतवाली थाना क्षेत्र के महोबा रोड पर टड़ेरा हार में एक महिला की संदेहास्पद मौत हुई थी। इस मामले में पीडि़ता के पुत्र और उसके जेठ के वीडियो कैमरे पर दिए गए आरोपों के हवाले से पत्रकारों ने खबर प्रकाशित की थी। खबर में कहा गया था कि परिजनों ने आरोप लगाए हैं कि पचौरी ढाबा संचालक के द्वारा महिला के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या की गई है। पुलिस ने इस रिपोर्टिंग को सुप्रीम कोर्ट की उस गाइड लाइन का उल्लंघन बताया जिसमें रेप पीडि़ता की पहचान और उसका फोटो उजागर नहीं किया जा सकता। जबकि कोतवाली पुलिस ने अब तक इस मामले में खुद ही रेप के आरोपों की पुष्टि नहीं की है न ही रेप से जुड़ी एफआईआर कोतवाली में दर्ज हुई है। जब पुलिस ही महिला को रेप पीडि़ता नहीं मानती तो उसकी पहचान उजागर किए जाने से गाइड लाइन का उल्लंघन कैसे हो गया? पत्रकारों ने कहा कि इसके पूर्व भी जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में पत्रकारों के विरूद्ध कुछ गलत मामले दर्ज हुए हैं। पुलिस अपने हिसाब से रिपोर्टिंग कराने का दबाव बनाते हुए पत्रकारों की आजादी छीनना चाहती है। पत्रकारों ने इस एफआईआर का विरोध करते हुए खात्मा लगाने की मांग उठाई तो वहीं इस मामले को लेकर हाईकोर्ट जाने और एफआईआर दर्ज करने वाले अधिकारियों पर मानहानि का केस करने की चेतावनी भी दी। प्रदर्शन के दौरान जिले के सभी वरिष्ठ पत्रकार और युवा पत्रकार मौजूद रहे। छतरपुर जिला मुख्यालय के अलावा इस मामले को लेकर बक्सवाहा, गौरिहार में भी पत्रकारों ने ज्ञापन सौंपकर पुलिसिया कार्यवाही का विरोध किया।

पत्रकार इकाई संघ गौरिहार ने तहसीदार गौरिहार के माध्यम से पुलिस महानिदेशक मध्यप्रदेश शासन भोपाल, गृह सचिव माध्यप्रदेश शासन भोपाल के नाम सौपा ज्ञापन

गौरिहार/ छतरपुर जिला मुख्यालय से महज चार किमी दूर थाना कोतवाली छतरपुर के टडेरा हार मे 26 अक्टूबर 2021को एक विवाहिता महिला संदिग्ध हालत मे मिली जिसकी अस्पताल मे मृत्यु हो गयी 27 अक्टूबर को सभी प्रादेशिक एवं सभी स्थानीय समाचार पत्रों मे प्रमुखता से प्रकाशित किया गया जिसमे मृतका की फोटो वा नाम पता इत्यादि सहित घटना का विवरण किया गया वहीं 29 अक्टूबर को दबंग मिडिया के पत्रकार भूपेंद्र सिंह और पोल खोल से पत्रकार धीरज चतुर्वेदी के नाम से इस घटना को लेकर खबर प्रकाशित की इस खबर के प्रकाशन के बाद छतरपुर पुलिस ने धीरज चतुर्वेदी और दबंग मिडिया के संपादक पर धारा 228 के तहत मुकदमा दर्ज कर दिया गया यह पूरी एफआईआर षणयंत्र है इसी संबंध मे पत्रकार इकाई संघ गौरिहार ने पत्रकार उतपीडन की साजिश रचने वाले पुलिस अधिकारियो के खिलाफ कार्यवाही की जाये और जो झूठी कहानी रचकर जो एफआईआर की गयीं है उस पर खात्मा लगाया जाये इस सम्बन्ध मे ज्ञापन दिया गया । ज्ञापन देने में रामबाबू पाल, प्रकाश मिश्रा,उदय अवस्थी, राजकुमार रिछारिया,राघवेन्द्र रिछारिया, राहुल द्धिवेदी, राममिलन घोष, प्रमोद अवस्थी, मौजूद रहे।

अरविन्द जैन

संपादक, बुंदेलखंड समाचार अधिमान्य पत्रकार मध्यप्रदेश शासन

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