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MP विधानसभा: आज भी गूंजा आरक्षण, कांग्रेस का वॉकआउट


भोपाल
विधानसभा के शीत सत्र के तीसरे दिन का प्रश्नकाल महिला और पहली बार चुने गए विधायकों के नाम रहा। यहां तक कि  महिला मार्शल ही विधानसभा अध्यक्ष को आसंदी तक ले गर्इं। दूसरी ओर आज भी सदन में पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण की गूंज सुनाई दी। नेता प्रतिपक्ष ने पूछा कि सदन को आश्वासन देने के बाद इस संबंध में क्या कदम उठाए गए हैं। जिस पर संसदीय कार्यमंत्री ने कहा आप आधा सच बोल रहे हैं। उधर, देश की राजधानी दिल्ली में संसद का शीत सत्र समय से एक दिन पहले स्थगित कर दिया गया। पूरे सत्र के दौरान 12 सांसदों के निलंबन पर हंगामा होता रहा।

पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण रोके जाने के बाद इस मामले में राज्य सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट जाने और उसकी तैयारियों को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा दिए गए बयान का मामला विधानसभा में बुधवार को भी गूंजा। नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ ने विधानसभा में शून्यकाल के दौरान कहा कि सदन में दिए गए आश्वासन के बाद नाथ ने कहा कि सदन के आश्वासन के बाद मुख्यमंत्री क्या कदम उठा रहे हैं? सदन में आज मुख्यमंत्री इसकी जानकारी दें।स्थिति स्पष्ट की जाए।

सरकार के साथ हम भी कोर्ट जाने को तैयार हैं। हमारे स्थगन प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया था। इसलिए हम सरकार का धन्यवाद भी करते हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती और मंत्री गोपाल भार्गव भी सवाल उठा चुके हैं कि रोटेशन और परिसीमन क्यों नहीं किया गया? ओबीसी के लोग चुनाव लड़ें या न लड़े, इसकी स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। इस पर संसदीय कार्यमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि आप आधा सच बोल रहे हैं। मिश्रा ने कहा कि यह तो वैसी ही बात हुई कि कातिल कत्ल करके पूछ रहा है कि इसे किसने मारा है। कांग्रेस के लोग रिवीजन में क्यों नहीं गए? मंत्री के इतना कहते ही बहस शुरू हो गई और कांग्रेस व भाजपा के सदस्य एक साथ बोलने लगे। बाद में हंगामे की स्थिति बनते देख अध्यक्ष ने दूसरा प्रस्ताव पढ़ने के लिए सदस्य का नाम बुला दिया।

विधानसभा में मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के अंतर्गत किए गए राशि के भुगतान को लेकर भाजपा विधायक उमाकांत शर्मा ने सरकार को घेरा और कहा  कि जब कोरोना काल में शादियां प्रतिबंधित थीं, उस समय उनके विधानसभा क्षेत्र में छह हजार विवाह कराकर 30 करोड़ से अधिक का भुगतान कर दिया गया। विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम ने इस मामले में आसंदी से ही सीईओ के विरुद्ध जांच कराने के निर्देश दिए। विधायक ने सीईओ के निलंबन की मांग उठाई जिस पर खनिज साधन मंत्री ने पंचायत मंत्री से चर्चा कर कार्यवाही के लिए आश्वासन दिया है।

दरअसल प्रश्नोत्तर काल शुरू होने पर पहली बार के भाजपा विधायक उमाकांत शर्मा ने जनपद सिरोंज में भवन और सन्निर्माण कर्मकार मंडल में पंजीकृत श्रमिकों की पुत्री के विवाह का मसला उठाया। इसके जवाब में श्रम मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह ने सदन को विस्तृत जानकारी दी। लेकिन असंतुष्ट विधायक का कहना था कि सीएम कन्यादान योजना में भ्रष्टाचार हुआ है।  यहां रिश्वत लेकर काम कराए जाते हैं। इसलिए सीईओ को सस्पेंड किया जाए और कार्यवाही हो।  

ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के चर्चा के दौरान विधायक शशांक भार्गव ने बिजली के भारी भरकम बिलों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में 70-70 हजार के बिजली बिल आ रहे हैं। मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर के जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस विधायक गर्भगृह में पहुंच गए और नारेबाजी करने लगे। इसके बाद कांग्रेस के सभी विधायकों ने सदन से बहिर्गमन कर दिया। मीडिया से चर्चा में नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ ने प्रमुख सचिव कल्पना श्रीवास्तव का तबादला भ्रष्टाचार उजागर करने का मसला उठाया और कहा कि वे जल्द ही कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी को मध्यप्रदेश बुलाएंगे। यूपी में प्रियंका गांधी के कारण गजब का माहौल बना है।

अरविन्द जैन

संपादक, बुंदेलखंड समाचार अधिमान्य पत्रकार मध्यप्रदेश शासन

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